कट्टरता और राष्ट्र।

*बदलाव एक आस*

भाग 2।

*कट्टरता और राष्ट्र*

*पंथनिरपेक्ष*
शब्द जो सुनिश्चित करता है कि देश मे धर्म के आधार पे भेदभाव नही होगा।

तथाकथित राष्ट्रवादियों की सरकार आने के बाद हिंदुत्व का बोलबाला है।
*हिंदुत्व* शब्द जिसका इतिहास रहा है सब को समाहित करके अपना बना लेने का और बराबर का सम्मान देने का।

कुछ वर्षों से कुछ कथित हिंदुओं ने इस शब्द का अर्थ बदल दिया है।

अब कुछ हिन्दू भी कट्टर होने लगे है,

उन्हें गाय के लिए इंसान की जान लेना सही लगने लगा है,
उन्हें अपने बच्चो के लिए स्कूल से पहले अब मंदिर चाहिए।

पिछले 3 सालों में हालात ज्यादा खराब हो गए।

में अलवर राजस्थान से आता हूँ, अलवर में इस साल 2 मुस्लिम भाइयों की कथित तौर पर गौरक्षकों ने हत्या कर दी।

जब अख़लाक़ और मुजफ्फरनगर पर मैंने अपने दोस्तों से बात कि थी तो उनमें से कुछ ने कहां था कि हिंदुओं ने सही किया।

में अचंभित था *कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में कोई कैसे कानून को हाथ मे लेने को सही ठहरा सकता है।*

थोड़ा पीछे चलते है।

*भारत*
विविधताओं में एकता वाला देश।

मध्यकालीन युग से बात करे तो मुगलों ने भारत को अपना घर बनाया, भारत की उन्नति में अपना योगदान दिया,और हिन्दू मुस्लिम एकता का एक नया अध्याय शुरू किया, इसी तरह हिंदुओं ने उन्हें अपना सम्राट माना और आजादी की पहली लड़ाई उनके नेतृत्व में लड़ी।

हम सम्मान के साथ एक दूसरे के साथ रहे।

फिर अंग्रेज आये, और उन्होंने 2 चीज़ों को बदला।
पहला शिक्षा और दूसरा सामाजिक एकता को।
उन्होंने हम बार बार बताया कि हम हिन्दू, मुस्लिम और सिख है और हम साथ नही रह सकते।
सन्देश साफ था, बांटो और राज करो।

और हम उनके जाल में फंस के हिन्दू और मुसलमान हो गए, और इसका अंत हुआ देश के 2 हिस्से होके।

कट्टर मुस्लिम पाकिस्तान चले गए और गरीब और बेसहारा या वतनपरस्त मुस्लिम हिंदुस्तान में रह गए।

इसका फायदा ये हुआ कि मुस्लिम कट्टरवाद देश मे लगभग खत्म हो गया, लेकिन नुकसान ये हुआ कि हिन्दू कट्टरता को थोड़ा बल मिल गया और जनसंघ जिसने आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नही दिया अब आजादी के बाद हिंदुत्व की बात करने लगा।

लेकिन कांग्रेस के करिश्माई नेतृत्व के सामने जनसंघ की चलती नही थी, पटेल और नेहरू ने देश को मजबूत नींव दी।

अब आज के दौर पे आते है।

पंथनिरपेक्ष राष्ट्र में धर्म के नाम पे वोट मांगे जा रहे है।
*आज तथाकथित राष्ट्रवादी पार्टी के राज में अल्पसंख्यकों में डर है।*

80 के दशक में जब बीजेपी ने देश मे हिंदुत्व के नाम पे जहर घोलना शुरू किया तबसे कांग्रेस ने मुसलमानों को अपना परम्परागत वोटर मान लिया और इनके भले के लिए कुछ नही किया।

और इसके चलते आज सामाजिक विषमता चरम पर है और देश कट्टरता की ओर बढ़ रहा है।

*अंग्रेजों ने जो काम 200 सालों में किया, इन काले अंग्रेजो ने कुछ ही सालों में कर दिया।*

*आज देश मे गाय की कीमत इंसान की जान से ज्यादा है।
*आज देश मे स्कूल बनाने पर नही मंदिर बनाने पर चर्चा होती है।
*देश का वो जिला(नर्मदा, गुजरात)जिसके किसी भी अस्पताल में ICU नही है वहां कुछ लोग दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बना के खुश हो रहे है।

आशाराम(rapist) की ट्रस्ट के स्कूलों(गुरुकुल) में हजारों बच्चे पढ़ते रहे और पढ़ भी रहे है, लेकिन मदरसों में सिर्फ आतंकी पैदा होते है कहना कहाँ तक जायज है ?

कट्टरता विनाश की तरफ ले जाती है ऐसे में,
*किधर जा रहा है देश ?*

अगर ऐसा ही चलता रहा तो मुझे अचरज नही कि कुछ वर्षों में कोई धर्म के नाम पे पार्टी बना ले और आगे चलकर अपने लिए एक अलग देश की मांग शुरू कर दे।

अपने तुच्छ फायदे के लिए आज के नेता देश को तोड़ रहे है, ऐसे फ़र्ज़ी राष्ट्रवादियों से बचे और अपने निकटम दूसरे धर्म के भाइयों के साथ प्यार से पेश आये।

धन्यवाद।

*मंजीत कुमार*

*बदलाव एक आस*

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